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चिकित्सा बोर्ड    
श्रमिक के कार्यस्थल पर रोजगार चोट के कारण हुई अपंगता की मात्रा और व्यवसायजन्य व्याधि का निर्धारण करने के लिए चिकित्सा बोर्ड की स्थापना की गई है . इसके अलावा वह अर्जन क्षमता की हानि का भी निर्धारण करता है ताकि क.रा.बी.योजना के तहत नकद क्षतिपूर्ति की जा सके .
प्रत्येक चिकित्सा बोर्ड में सामान्यत: 3 चिकित्सा अधिकारी होते हैं जिनमें से एक अध्यक्ष के तौर पर नामित होता है . उनमें से एक उस चिकित्सा शाखा का विशेषज्ञ होता है जिससे बीमाकृत व्यक्ति की बीमारी सम्बंधित है .
प्रत्येक राज्य में गठित होने वाले चिकित्सा बोर्डों की संख्या बीमाकृत व्यक्तियों की संख्या, क्षेत्रफल और दूरी पर निर्भर करती है .

परस्पर सन्दर्भ

  • चिकित्सा बोर्ड / विशेष चिकित्सा बोर्ड को संदर्भन
  • चिकित्सा बोर्ड के निर्णय की समीक्षा
  • व्यवसायजन्य रोगों के लिए विशेष चिकित्सा बोर्ड

 

 shramik ke kaarysthal par rojgaar chot ke karan hui apangata ki maatra aur vyavsayjany क.रा.बी.अधिनियम की धारा 45(आय)(बी) के तहत नियुक्त वसूली अधिकारी को धारा 45(क) विनियम 31(क) धारा 45(बी)(आय) और विनियम 31(ग) के प्रावधानों के तहत निर्धारित क.रा.बी. अंशदान, ब्याज और हर्जानों को वसूलने का अधिकार दिया गया है . यह वसूली अधिनियम की धारा 45(ग) से 45 (झ) तथा आवश्यक आशोधनों / बकाया के रूप में उद्धृत कतिपय शब्दों के प्रतिस्थापन के साथ समय समय पर यथासंशोधित आयकर अधिनियम 1961(1961 का 43) की दूसरी एवं तीसरी अनुसूची और आयकर (प्रमाणपत्र कार्यवाही) नियम 1962 में उल्लिखित प्रावधानों के अनुरूप की जाती है . वसूली के लिए वसूली अधिकारी फॉर्म सी.पी.2 में मांग की नोटिस जारी करता है . इसके अनुपालन के लिए वह 15 दिन का समय देता है . इस नोटिस का अनुपालन न करने की स्थिति में वसूली अधिकारी निम्नांकित एक या अधिक तरीकों को अपनाता है :-

    1. कारखाने या स्थापना / प्रधान / आसन्न नियोक्ता की चल और अचल संपत्ति की कुर्की एवं बिक्री
    2. नियोक्ता की गिरफ्तारी एवं उसे जेल भेजना
    3. कारखाने या स्थापना / प्रधान / आसन्न नियोक्ता की चल और अचल संपत्तियों के लिए रिसीवर की नियुक्ति